Digital Payment Advantage | Minimize the effect of counterfeit money

हेल्लो दोस्तो ,आज में एक नया जानकारी और ब्रेकिंग न्यूज के साथ गुड मॉर्निंग विश करना चाहूंगा।


आज जैसे में अख़बार खोले, देखे तो इस तरह हेडलाइन  " ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगद्दान को बढ़ ने के लिए सरकार जोर देरहा है।और आरबीआई के आंकड़ा से पता चलता है कि  सरकार के तरफ से को ने नोटबंदी ऐलान किया था वो एक तरफ से असफल हुआ है मालूम चलता है। नवंबर ,2016 में भी के बैंकिग सिस्टम में 10.97 लाख करोड़ रुपया नकदी थी। जो 2021 में यह 57 परसेंटेज बढ़कर 28 लाख करोड़ होगया।इसी बीच डिजिटल भूकदान जरूर बढ़ा है,लिकिन सरकार और आरबीआई इससे बहुत खुश नहीं है।सरकार के ए मकसद कामाइब नहीं होने के पीछे ग्रामीण इलाका है।ग्रामीण इलाकों में नकदी लेनदेन पहले के हिसाब से बढ़ है और डिजिटल  भुकदान नाकामियाब रहा है। डिजिटल भुकदान नाकामियाब होने दो बजहा है दुकानदारों के पास स्मार्ट फोन नहीं है और इस इलाकों ने जीपीआरएस काम नहीं कर रहा है।सरकार और आरबीआई इसी कमी दूर करने के लिए 614 करोड़ रुपया खर्च कर रहा है।इससे प्वाइंट आफ सेल(POS) के प्रचलन बढ़ाने पर ज्यादा जोर देना रहेगा।"

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   तो अभी आपके मन में यही प्रश्न आया होगा कि सरकार कियूं डिजिटल भुकदन के लिए इतना कोसिस कर रहा है।तो चलिए कारण बताते है।

  • किसी व्यक्ति के लिए कार्ड/डिजिटल लेनदेन करने में आसानी में सुधार करना।
  • व्यक्तिगत स्तर पर नकदी को संभालने के जोखिम और लागत को कम करें।
  • अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रबंधन की लागत कम करें।
  • बेहतर क्रेडिट एक्सेस और वित्तीय समावेशन को सक्षम करने के लिए लेनदेन इतिहास बनाएं।
  • कर से बचाव कम करें।
  • नकली धन के प्रभाव को कम करें।

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