गुस्सायें भारतीय सैनिकों ने 18 चीनी सैनिकों की तोड़ी गर्दन , पहचानना हुया मुश्किल…
एशियन एज अखबार ने विभिन्न स्रोतों के हवाले से खबर दी है कि अपने सीओ की शहादत से गुस्साए भारतीय सैनिकों ने एक-एक कर 18 चीनी सैनिकों की गर्दनें तोड़ दीं।
एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि कम-से-कम 18 चीनी सैनिकों के गर्दनों की हड्डियां टूट चुकी थीं और सर झूल रहे थे। अपने कमांडर की वीरगति प्राप्त होने से गुस्साए भारतीय सैनिक इतने आक्रोशित हो गए कि सामने आने वाले हर चीनी सैनिक का वो हाल किया कि उनकी पहचान कर पाना भी संभव नहीं रहा। गलवान में 15 जून को चीनी सैनिकों के धोखे से हिंसक हमले में अपने कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू के शहीद होने के बाद बिहार रेजीमेंट के जवानों का वही रौद्र रूप सामने आ गया। दरअसल, उस रात बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बहादुरी की कहानी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई। उस रात चीनी सैनिकों की संख्या भारतीय सेना की तुलना में 4 गुना अधिक थी। इतना ही नहीं, चीनी सैनिक ने योजना बनाकर हमला किया था जबकि भारतीय सैनिकों ने ऐसी कोई तैयारी नहीं कर रखी थी क्योंकि उन्हें चीनियों के अचानक धोखे की अशंका नहीं थी। बावजूद इसके, हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को ऐसा सबक सिखाया कि उसकी सरकार इस खूनी झड़प पर कुछ बोल नहीं पा रही है। भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन उकसावे पर माकूल जवाब देने में कभी पीछे नहीं हटता है और न हटेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ इसी अंदाज में चीन का नाम लिए बिना स्पष्ट चेतावनी दी थी। कुछ यही रीति-नीति भारतीय सैनिकों की भी है। भारतीय सैनिक एक हद तक विरोधियों को बर्दाश्त करती है, लेकिन जब विरोधी जब हद पार कर देते हैं तो फिर उन्हें कैसे रौद्र रूप का सामना करना पड़ता है, यह कोई चीनियों से पूछे।
एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि कम-से-कम 18 चीनी सैनिकों के गर्दनों की हड्डियां टूट चुकी थीं और सर झूल रहे थे। अपने कमांडर की वीरगति प्राप्त होने से गुस्साए भारतीय सैनिक इतने आक्रोशित हो गए कि सामने आने वाले हर चीनी सैनिक का वो हाल किया कि उनकी पहचान कर पाना भी संभव नहीं रहा।
गलवान में 15 जून को चीनी सैनिकों के धोखे से हिंसक हमले में अपने कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू के शहीद होने के बाद बिहार रेजीमेंट के जवानों का वही रौद्र रूप सामने आ गया।
दरअसल, उस रात बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बहादुरी की कहानी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई। उस रात चीनी सैनिकों की संख्या भारतीय सेना की तुलना में 4 गुना अधिक थी।
इतना ही नहीं, चीनी सैनिक ने योजना बनाकर हमला किया था जबकि भारतीय सैनिकों ने ऐसी कोई तैयारी नहीं कर रखी थी क्योंकि उन्हें चीनियों के अचानक धोखे की अशंका नहीं थी। बावजूद इसके, हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को ऐसा सबक सिखाया कि उसकी सरकार इस खूनी झड़प पर कुछ बोल नहीं पा रही है।
भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन उकसावे पर माकूल जवाब देने में कभी पीछे नहीं हटता है और न हटेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ इसी अंदाज में चीन का नाम लिए बिना स्पष्ट चेतावनी दी थी।
कुछ यही रीति-नीति भारतीय सैनिकों की भी है। भारतीय सैनिक एक हद तक विरोधियों को बर्दाश्त करती है, लेकिन जब विरोधी जब हद पार कर देते हैं तो फिर उन्हें कैसे रौद्र रूप का सामना करना पड़ता है, यह कोई चीनियों से पूछे।

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